यूं तो उजाला दिये भी देते हैं मगर
सारा जहां रौशन हो वो आफ़ताब बनो
मंगलवार, 5 जनवरी 2021
शुक्रवार, 1 जनवरी 2021
Ghazal - मयखाने चलो यारों - अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Maykhane Chale Yaron - Avaneesh Ki Ghazal, Shayari
Ghazal - मुझे रुलाओ ना - अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Mujhe Rulao Na - Avaneesh Ki Ghazal, Shayari
Ghazal - मरीज़ - ए - इश्क़ हूं - अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Mareez - E - Ishq Hun ।
Ghazal - ज़माना शोर करता है तो शोर करने दो । अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' Zamana Shor Karta Hai Shor Karne Do । Avaneesh Ki Ghazal
बुधवार, 16 दिसंबर 2020
हवस मिटा सकूं, अब ऐसा कोई इश्क़ चाहिए मुझे । ग़ज़ल । अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Avaneesh Ki Ghazal, Shayari
मंगलवार, 15 दिसंबर 2020
तेरी मोहब्बत भी क्या मोहब्बत थी । ग़ज़ल । अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Avaneesh Ki Ghazal
शुक्रवार, 11 दिसंबर 2020
फिर से दिसंबर लौट आया (ग़ज़ल) । अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Avaneesh Ki Ghazal, Shayari
बुधवार, 9 दिसंबर 2020
खून में गर्मी है तो उबाल रखो (ग़ज़ल) अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Avaneesh Ki Ghazal
मुड़कर देखा नहीं उसने जाने के बाद (ग़ज़ल) - अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत', Avaneesh Ki Ghazal
शुक्रवार, 31 जुलाई 2020
Ghazal - ज़माने भर के दुश्मन हमदर्दियां जताने लगे गले लगाया भी तो छूरिया चलाने लगे | Avaneesh Kumar Mishra
New Ghazal Lyrics - मैं वो सांप हूं इक वीरान जंगल का किसी को काट लूं तो लहर ना आए । Avaneesh Kumar Mishra
तिरपटा चलो कहीं शहर ना आए
मैं वो सांप हूं इक वीरान जंगल का
किसी को काट लूं तो लहर ना आए
तू ही मेरे हर इक मर्ज की दवा है
तू जो घुले तो मुझमें ज़हर ना आए
कर्म इतने अच्छे किए हैं हमने जीवन में
सीधे चलो कहीं बहर ना आए
तेरी जिंदगी तो दरिया है दरिया
सम्भल कर चलो कहीं नहर ना आए
इस क़दर हम तुम समा जाएं इक दूजे में
ज़माना दिया जलाकर देखे तो भी नज़र ना आए
हिम का अंश हो तुम मैं अवगुणों का नाश करता हूं
रविवार, 9 दिसंबर 2018
घुट - घुट के मर जायें | गजल | - अवनीश कुमार मिश्रा (लेखक , कवि)
तुझे छोड़कर हम कहाँ चल जायें
तुझे छोड़कर हम कहाँ चल जायें
घुट - घुट के मर जायें
हो हो घुट - घुट के मर जायें
बोलो...
घुट - घुट के मर जायें |
वो भी क्या ज़माने थे
जब तुम मेरे साथ रहती थी
वो भी क्या ज़माने थे
जब तुम मेरे साथ रहती थी |
छोड़ेंगे न तेरा साथ
हर पल कहा करती थी
छोड़ेंगे न तेरा साथ
हर पल कहा करती थी |
अब तेरे जैसा यार कहाँ पायेंगे
अब तेरे जैसा यार कहाँ पायेंगे
घुट - घुट के मर जायें
हो हो घुट - घुट के मर जायें
बोलो...
घुट - घुट के मर जायें |
हम करें भी तो प्यार किसे करें
जिससे हुआ , बस सपनों में
तुम्हारी निगाहों से
निगाहें मिलाते थे
तुम्हारी निगाहों से
निगाहें मिलाते थे |
तेरी वीरान गलियों में
बस हम अकेले जाते थे
तेरी वीरान गलियों में
बस हम अकेले जाते थे |
अब अवनीश किस गली को जायेंगे
अब अवनीश किस गली को जायेंगे
घुट - घुट के मर जायें
हो हो घुट - घुट के मर जायें
बोलो...
घुट - घुट के मर जायें |
शनिवार, 7 अप्रैल 2018
जो दिल से आह निकले तो हमें सम्भाल लेना तुम (गज़ल) अवनीश कुमार मिश्रा
बाजी जीत कर भी बाजी हार जाना तुम
जो दिल से आह निकले तो हमें सम्भाल लेना तुम
हमें दिल से लगाना न सही
दिल से दो -चार थप्पड़ मार देना तुम
×××××××××××××××××××××××××××××××
जो दिल से आह निकले तो हमें सम्भाल लेना तुम
जो दिल से आह निकले तो हमें सम्भाल लेना तुम
×××××××××××××××××××××××××××××××
बाग - बगीचे में हर जगह याद आती तुम
बचपन की यादों में भी याद आती तुम
पल - पल मर रहा हूँ तेरी याद में
अवनीश के धड़कनों में भी याद आती तुम
×××××××××××××××××××××××××××××××
जो दिल से आह निकले तो हमें सम्भाल लेना तुम
जो दिल से आह निकले तो हमें सम्भाल लेना तुम
रविवार, 4 मार्च 2018
क्या पता था इश्क में ठोकरें खायेंगे(गजल)
क्या पता था इश्क में ठोकरें खायेंगे
इस तरह से मोहब्बत की सजा पायेंगे - 2
वो तो चली गयी हमें छोड़कर ,||
दो शब्द प्यार के तरस जायेंगे ||
क्या पता था इश्क में ठोकरें खायेंगे
इस तरह से मोहब्बत की सजा पायेंगे -2
मतलबों की दुनिया है पता चल गया ,||
चार दिन में सब जन गुजर जायेंगे ||
क्या पता था इश्क में ठोकरें खायेंगे
इस तरह से मोहब्बत की सजा पायेंगे -2
वो सुहाने जमाने गुजर ही गयें ,||
फूल राहों में मेरे न खिल पायेंगे ||
क्या पता था इश्क में ठोकरें खायेंगे
इस तरह से मोहब्बत की सजा पायेंगे -2
अवनीश कोशिश करे की भुुलाये उसे ,||
याद में उसके आँसू निकल जायेंगे ||
क्या पता था इश्क में ठोकरें खायेंगे
इस तरह से मोहब्बत की सजा पायेंगे -2
शनिवार, 24 फ़रवरी 2018
तेरे इश्क का वो सनम आया है (गजल)
तेरे इश्क का वो सनम आया है
देखते देखते दिन गुजर आया है -2
जिन्दगी की ये मोती बिखरनी न थी ,||
चोट ऐसी लगी कि बिखर आया है ||
तेरे इश्क का वो सनम आया है
देखते देखते दिन गुजर आया है -2
आग इतना लगाके बदन में मेरे ,||
किसी और पर दिल तेरा आया है ||
तेरे इश्क का वो सनम आया है
देखते देखते दिन गुजर आया है -2
अपनी तिरछी नजरिया से घायल किया ||
दिल मेरा ये तभी से सिहर आया है ||
तेरे इश्क का वो सनम आया है
देखते देखते दिन गुजर आया है -2
अपनी सुन्दर सुरतिया से मुस्कायी वो ||
अवनीश कुमार मिश्रा का तब से ये दिल आया है ||
तेरे इश्क का वो सनम आया है
देखते देखते दिन गुजर आया है -2
नोट - यह गजल अवनीश कुमार मिश्रा यानि हमारे द्वारा लिखी गयी है इस गजल में अगर आप आवाज देना चाहते हैं तो इसके लिए आपको हमसे अधिकार की जरूरत होगी
अगर बिना अधिकार के इसका उपयोग किया तो यह अपराध होगा , चाहे आवाज दें या किसी प्रकार ब्लाग या वेबसाइट में प्रयोग करें |
इस गजल का सारा अधिकार हमारे पास है आप इसमें आवाज देने के लिए हमसे contact पेज पर जाकर massage करें |
मंगलवार, 26 सितंबर 2017
हम तुम्हारे प्यार में क्या - क्या हुये सनम्
हम तुम्हारे प्यार में क्या - क्या हुये सनम्
क्या - क्या बनेगें और हम बता दो ये सनम्
हम तुम्हारे प्यार में पागल थे कभी
पागल न था पर पागल कहते थे सभी
फिर भी तुम्हारे गलियों में जाता रहा मैं
न पागल हूँ न पागल हूँ बताता रहा मैं
कितनो ने मारा मुझे चप्पल निकालकर
कुछ ने तो मारा मुझे ताने मारकर
पर दिल के मारे बेचारे को दर्द न हुआ
जब तूने मेरे दिल पे चोट दिया तो कह पड़ा कैसा है यह करम्
हम तुम्हारे प्यार में क्या - क्या हुये सनम्
क्या - क्या बनेगें और हम बता दो ये सनम्
कॉलेज की वो शरारतें अब याद आती हैं
धड़कन में ही रहती हैं भूले नहीं भुलाती हैं
यादें क्या होती हैं अब मुझे याद आ गया
पलके झपकता हूँ तो लगता है कोई आ गया
सपने में मैं कभी लम्बे ख्वाबों में खो जाता हूँ
फिर हरे , सुहाने मौसम में तेरी बाहों में सो जाता हूँ
मेरे लिए तेरे प्यार को देखकर अच्छा लगा
क्या पता जो हम देख रहे वो है मेरा भ्रम
हम तुम्हारे प्यार में क्या - क्या हुये सनम्
क्या - क्या बनेंगे और हम बता दो ये सनम्
भूल जाऊँगा सभी वो बीती बातें
भूल जाऊँगा सभी वो बीती रातें
जो जख्म दिया है तुमने उसको भी भूल जाऊँगा
नदी ,नालों में कूद जाऊँगा या फाँसी लगाकर झूल जाऊँगा
तेरे लिए जो कहे तो हद से गुजर जाऊँ
तू जो कहे तो कटार मार के मर जाऊँ
जो कुछ भी हो जाये बेवफा पर तुम्हें खबर नहीं होगी
दिल के मारे अवनीश कुमार मिश्रा कह पड़े मिला ऐसा क्यों जनम्
हम तुम्हारे प्यार में क्या - क्या हुये सनम्
क्या - क्या बनेंगे और हम बता दो ये सनम्
शनिवार, 29 अक्टूबर 2016
मैं मर रहा हूँ तेरे याद में तो आपको क्या गम है (गजल)"दर्द-ए-दिल"किताब
बुधवार, 7 सितंबर 2016
तूने दर्द दे दिया अरे वो बेहया(गजल)दर्द-ए-दिल"किताब"
रविवार, 10 जुलाई 2016
तेरी यादों में जिन्दगी गंवा रहा है कोई--(गजल)"दर्द-ए-दिल"किताब"
यादों में तेरे कितना मर रहा है ,
