सोमवार, 18 अप्रैल 2022
मंगलवार, 5 जनवरी 2021
Ghazal - समझ से बाहर हो ऐसा राज़ बनो । अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Avaneesh Ki Ghazal, Shayari
यूं तो उजाला दिये भी देते हैं मगर
सारा जहां रौशन हो वो आफ़ताब बनो
शुक्रवार, 1 जनवरी 2021
Ghazal - मुझे रुलाओ ना - अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Mujhe Rulao Na - Avaneesh Ki Ghazal, Shayari
Ghazal - मरीज़ - ए - इश्क़ हूं - अवनीश कुमार मिश्रा 'मोहब्बत' । Mareez - E - Ishq Hun ।
शनिवार, 13 अक्टूबर 2018
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया पागल भईल बा दुनिया रे ( भोजपुरी लोकगीत ) - अवनीश कुमार मिश्रा
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हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
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आज के यहि समइया में भइया
लोक - लज्जा खतम होय गा
पहले रहले सब माई औ बाबू
अब तो सब कुछ सनम होय गा - 2
लौंडे भी पहले माई रटत रहले अब तो रटेले सजनियाँ रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
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मिनी स्कर्ट के जमाना है आइल
कपड़ा सबकै कसल होय गा
देशी केहू के मनवा न भावै
विदेशी कपड़वक नसल होय गा -2
घर परिवार कै नकवा कटावै , होय ई केहकर बबुनिया रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
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इनही के चक्कर मा ये मोरे भइया
अवनिशवा बेचारा खराब होय गा
(सिंगर) रोवत है ये मोरे भइया
दूनौं के ज़िनगी शराब होय गा -2
अब तौ बतावा ये मोरी सजनी कैसी कटी मोर जवनिया रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
हो जबसे उतरल बा तन से ओढ़निया
पागल भईल बा दुनिया रे
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अवनीश कुमार मिश्रा (लेखक , कवि)
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मंगलवार, 5 जून 2018
काहे नाही मोरे सजनवा बम्बई से कबहू आवैं हो
कशमकश करा ता हमरो जवनिया
कोई न टाँका भिड़ावै हो -2
काहे नाही मोरे सजनवा
काहे नाही मोरे सजनवा बम्बई से कबहू आवैं हो -2
जब से तू गईला तबसे न अईला
तड़पेली मोर जवानी हो
रोजे देखेली तोहरे सपनवा
भईल जवानी मोर पानी हो -2
तोहरे वियोग में ऐ हो बलमुआ कुछू न हमका भावै हो
काहे नाही मोरे सजनवा
काहे नाही मोरे सजनवा बम्बई से कबहू आवैं हो -2
तोहरे यदवा में ऐ मोरे राजा
नीक न लागे खनवा हो
अब तो चले आवा ये मोरे रजऊ
ले लेबा का पिया जनवा हो -2
भूखे - प्यासे मा भइली हम आधा कोई दवाई न लावै हो
काहे नाही मोरे सजनवा
काहे नाही मोरे सजनवा बम्बई से कबहू आवैं हो -2
राइटर अवनीश से कैसे कही
राजा के हमरे बुलाला हो
कहे - - - कि हमरा के अब
कुछू नाही बुझाला हो -2
तोहरा गईला के बाद ये रजऊ देवरा बहुत सतावै हो
काहे नाही मोरे सजनवा
काहे नाही मोरे सजनवा बम्बई से कबहू आवैं हो -2
गीतकार - अवनीश कुमार मिश्रा
