शुक्रवार, 31 जुलाई 2020
New Ghazal Lyrics - मैं वो सांप हूं इक वीरान जंगल का किसी को काट लूं तो लहर ना आए । Avaneesh Kumar Mishra
तिरपटा चलो कहीं शहर ना आए
मैं वो सांप हूं इक वीरान जंगल का
किसी को काट लूं तो लहर ना आए
तू ही मेरे हर इक मर्ज की दवा है
तू जो घुले तो मुझमें ज़हर ना आए
कर्म इतने अच्छे किए हैं हमने जीवन में
सीधे चलो कहीं बहर ना आए
तेरी जिंदगी तो दरिया है दरिया
सम्भल कर चलो कहीं नहर ना आए
इस क़दर हम तुम समा जाएं इक दूजे में
ज़माना दिया जलाकर देखे तो भी नज़र ना आए
हिम का अंश हो तुम मैं अवगुणों का नाश करता हूं
सोमवार, 4 नवंबर 2019
New Sad Shayari | दर्द भरी शायरी | वो आलीशान मकां किसका है - अवनीश कुमार मिश्रा
तू है क्या यार तू मुझे रास्ता बताती है
अरे ये वही रास्ता है जहां मेरी सुबह - शाम होती थी
अब बस करना यार और कितना झूठ बोलोगे
हम से कहती हो की किसी और से तो नहीं बोलोगे
सब जानकर तू क्यों अंजान बनती है पगली
ये वही जगह है जहां तेरी - मेरी मुलाक़ात होती थी
इतने दिनों में बड़े किस्से सुने हैं तेरे
सुना है अब बेवफा हो गई हो
मेरे दोस्त कहते हैं कि तू गरीब है
तो ये बता कि जिस छत से तू अवनीश को देखती थी वो आलीशान मकां किसका है |
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मंगलवार, 10 सितंबर 2019
New Sad Shayari "Na Radha Aur Shayam Hain" By Avaneesh Kumar Mishra (Writer , Poet)
जब हमारी जिंदगी ही गुमनाम है ,
कुछ ऐसे जी रहा हूँ ,
जैसे राधा बिन श्याम हैं |
न राधा और श्याम हैं ,
हम तो इक सताये हुए हैं ,
हमारा तो प्यार भी गुमनाम है |
वो प्यार करती थी या नहीं,
पर अवनीश प्यार करता था |
रविवार, 10 फ़रवरी 2019
जिसे दिल से चाहा वो तो पत्थर दिल निकली | शायरी | New Hindi , Urdu Shayari | अवनीश कुमार मिश्रा (लेखक , कवि)
उसे जब - जब देखता हूँ
बस इक आह निकलती है ,
कि वो हमारी क्यों न हुई |
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पर अब सोंचने से क्या फायदा
शायद हमें ही न था ,
प्यार करने का कायदा |
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हम उन्हें पसंद न थे या वो डरती थी
पता नहीं क्यों वो मुझसे ,
मोहब्बत न करती थी |
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अब किसे इश्क की पड़ी है
जिसे दिल से चाहा वो ,
तो पत्थर दिल निकली |
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दिल ही था , वो भी बिखर गया
अवनीश के सामने अब ,
मौत भी खड़ी है |
सोमवार, 31 दिसंबर 2018
कुछ ऐसे जी रहा हूँ , जैसे राधा बिन श्याम हैं (दर्द भरी शायरी) - अवनीश कुमार मिश्रा लेखक , कवि
काहे की खुशी
जब हमारी जिंदगी ही गुमनाम है ,
कुछ ऐसे जी रहा हूँ ,
जैसे राधा बिन श्याम हैं |
न हम प्रेम की गलियों में बदनाम हैं
न राधा और श्याम हैं ,
हम तो इक सताये हुए हैं ,
हमारा तो प्यार भी गुमनाम है |
पता नहीं वो डरती थी या मैं डरता था
वो प्यार करती थी या नहीं,
पर अवनीश प्यार करता था |

